आइने का अक्स मुझे कभी पसंद नहीं था
मेरा चेहरा सिर्फ मेरे दीमाग मे था
आईने का चेहरा में खोना चाहता था
हमेशा के लिए ।।
मेरा चेहरा सिर्फ मेरे दीमाग मे था
आईने का चेहरा में खोना चाहता था
हमेशा के लिए ।।
पर कुछ जोड़े हुए था मुझे
कुछ अजीब सा
कुछ अपना सा
कुछ अपना सा
जिसे न मैं छु पाता
न देख पाता था
पर वो सुनाई ज़रूर देता था
जीवन के संगीत की तरह
सितार की आवाज़ हो जैसे ।।
एक दिन आईने के सामने खड़े होके
मैंने अपना चेहरा नोचना शुरू किया
कितना वक़्त लगा यह कहना तो मुश्किल है
पर आईने से जब खून साफ़ किया तो
एक अजनबी खड़ा था
और उस दिन से सितार की आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गयी ।।
मैंने अपना चेहरा नोचना शुरू किया
कितना वक़्त लगा यह कहना तो मुश्किल है
पर आईने से जब खून साफ़ किया तो
एक अजनबी खड़ा था
और उस दिन से सितार की आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गयी ।।